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स्वास्थ्य योजनाओं ने बदली ज़िंदगी, उम्मीद और विश्वास की नई मिसाल।

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बदायूँ: 18 जून। जनपद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, नवजात देखभाल तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से अनेक परिवारों को नया जीवन, सुरक्षा और बेहतर भविष्य मिला है।
आसफपुर विकासखंड के ग्राम कुआंडा में जन्मी नन्हीं सरस्वती इसका जीवंत उदाहरण है। जन्म के समय उसका वजन मात्र 2.1 किलोग्राम था और वह कम जन्म वजन (लो बर्थ वेट) की श्रेणी में थी। पर्याप्त स्तनपान न मिलने और उचित देखभाल के अभाव में उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती गई। नियमित गृह भ्रमण के दौरान आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने समस्या की पहचान की। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परिवार को परामर्श दिया, कंगारू मदर केयर (केएमसी) की जानकारी दी तथा आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया। निरंतर निगरानी और देखभाल के परिणामस्वरूप सरस्वती का स्वास्थ्य सुधरा और आज वह एक स्वस्थ एवं सक्रिय बालिका है।
इसी प्रकार भोजपुर क्षेत्र की ज्योति को गर्भावस्था के शुरुआती चरण में ही उच्च जोखिम गर्भवती (एचआरपी) के रूप में चिन्हित किया गया। उनका हीमोग्लोबिन स्तर अत्यंत कम था, जिससे मां और शिशु दोनों के लिए खतरा था। आशा, एएनएम एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लगातार काउंसिलिंग, नियमित एएनसी जांच, आयरन थेरेपी तथा संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया गया। परिणामस्वरूप सुरक्षित प्रसव हुआ और ज्योति ने 2800 ग्राम वजन के स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। मां और बच्चा दोनों पूर्णतः स्वस्थ हैं।
बिसौली क्षेत्र के ग्राम पहाड़पुर में जुड़वा बच्चों के जन्म का मामला भी स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता का उदाहरण है। गर्भवती महिला को उच्च जोखिम श्रेणी में चिन्हित कर लगातार निगरानी की गई। समय पर रेफरल, सुरक्षित संस्थागत प्रसव तथा जन्म के बाद कंगारू मदर केयर और होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर के माध्यम से दोनों बच्चों की देखभाल सुनिश्चित की गई। आज दोनों बच्चे स्वस्थ हैं और सामान्य रूप से विकास कर रहे हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत ग्राम नदायल निवासी सात वर्षीय सोहेल को जन्मजात हृदय रोग से मुक्ति मिली। विद्यालय में स्वास्थ्य जांच के दौरान उसकी पहचान हुई। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार महंगे उपचार का खर्च उठाने में असमर्थ था। आरबीएसके टीम ने आवश्यक समन्वय स्थापित कर उसे उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान में निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया। सफल हृदय शल्य चिकित्सा के बाद सोहेल आज सामान्य बच्चों की तरह खेल-कूद और दैनिक गतिविधियों में भाग ले रहा है।

ये कहानियां दर्शाती हैं कि समय पर पहचान, प्रभावी परामर्श, समर्पित स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत तथा शासन की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से गंभीर परिस्थितियों को भी सफलता में बदला जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की ये पहलें न केवल जीवन बचा रही हैं, बल्कि समाज में विश्वास, जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव भी स्थापित कर रही हैं।

Aaptak24

संपादक:–विवेक चौहान

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